हरियाणा

बहादुरगढ़ शहर की प्यास बुझाने वाली इकलौती नहर को नाले का रूप देने जा रहे अधिकारी

सत्यखबर बहादुरगढ़ (योगेन्द्र सैनी) – नगर परिषद शहर की प्यास बुझाने वाली इकलौती नहर को नाले का रूप देने के लिए उतारू है। सिंचाई विभाग द्वारा नाले के निर्माण पर रोक लगाने और अवमानना की स्थिति में कैनाल एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देने के बावजूद भी इस नाले का निर्माण रुक नहीं रहा। दरअसल बहादुरगढ़ माइनर से लोगों को पीने के लिए और किसानों के खेतों के लिए पानी सप्लाई किया जाता है। नियम कायदों को ताक पर रखकर बहादुरगढ़ के सेक्टर 6 से बरसाती पानी को निकालने के लिए नगर परिषद द्वारा एक नए नाले का निर्माण किया जा रहा है। नगर परिषद ने इस नाले को बहादुरगढ़ माइनर में जोड़ने का लक्ष्य रखा है। लेकिन स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद भी नगर परिषद के अधिकारी इस नाले का निर्माण नहीं रुक रहा।

हम आपको बता दें कि सेक्टर6,7 में बनाए जा रहे इस नाले को अगर बहादुरगढ़ माइनर से जोड़ा गया तो स्थिति भयावह होने की आशंका बन जाएगी। सीवर के पानी युक्त गंदा पानी पीने के पानी में मिक्स हो जाएगा। जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ सकता है। शहर में जलापूर्ति और आस-पास के गांव को उपजाऊ बनाने वाली नहर को प्रदूषित करने की साजिश नगर परिषद रच रही है। शहर के सेक्टर 6 और 7 से निकलने वाले गंदे पानी को पाइपों के जरिए पहली पुलिया के पास एकत्रित किया जाएगा और फिर वहां बने एक फिट में से नहर में डालने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। लोगों ने एसडीएम से मुलाकात कर भी इस नहर के अस्तित्व को बचाने की मांग की है। लेकिन अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए हैं।

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बहादुरगढ़ का शहरी क्षेत्र पेयजल के लिए इसी नहर पर आश्रित है। इसके अलावा शहर से सटे गांव में सिंचाई के लिए भी इसी नहर द्वारा पानी सप्लाई किया जाता है। लोगों के लिए तो यह नहर जीवनदायी जैसी है। लेकिन जानबूझकर इस नहर को बदहाल बनाया जा रहा है। सेक्टर 7 के समीप इसमें गंदे नाले के पानी को डालकर प्रदूषित बनाने का प्रयास सिरे चढ़ाया जा रहा है। जिससे गंदे पानी में नहाने से विभिन्न प्रकार के चर्म रोग हो सकते हैं। यहां तक की फोड़े, फुंसी, दाद, खाज और खुजली जैसे रोगों से बचने के लिए भी जरूरी है कि हम साफ पानी में स्नान करें। यहां के स्थानीय लोगों के साथ साथ पूर्व पार्षद वजीर राठी का कहना है कि जनहित को देखते हुए इस दिशा में कदम उठाना सरकार का दायित्व होना चाहिए और प्रशासन को भी समझना चाहिए। गंदे पानी को पीने का पानी सप्लाई करने वाली नहर में जोड़ने से रोकना चाहिए।

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हम आपको बता दें सिंचाई विभाग के जेई की रिपोर्ट के आधार पर एसडीओ ने 5 मार्च को नगर परिषद बहादुरगढ़ को पत्र लिखकर बहादुरगढ़ माइनर के दाहिने किनारे को बिना अनुमति के क्षति पहुंचाने पर आपत्ति जताई है। साथ ही पेयजल व सिंचाई के लिए बनी नहर में नाले के पानी को नहीं डालने की हिदायत देते हुए नाले के निर्माण पर रोक लगाने के दिशा निर्देश दिए हैं। साथ ही इस पत्र की अवमानना की स्थिति में कैनाल एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी है। लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों के कान पर अब तक जूं नहीं रेंगी है।

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